Tuesday, April 03, 2018

-----------***मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर***-------

मेरी नयी कृति ...
समर्पित है 
मेरे  विद्यार्थियों को :

                                                 

मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर।


शरद, शीत, वर्षा, ऋतु कोई
तू डाली डाली लहका कर
मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर।।

घनघोर घटा, बादल काले

अंधड़ कितने भी आ जायें

तू बन बिजली बस चमका  कर

मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर।।


कर्कश कलरव कटु वचन कुटिल

विचलित करने को तत्पर हैं

बस कोयल बन तू चहका कर

मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर ।।


पथ भ्रष्ट हुए तो होने दे

मति भ्रष्ट हुई तो होने दे

सच की गलियों में भटका कर

मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर ।।


बक, काग, श्वान, अल्पाहारी

गृह त्याग सके, बन अटल अचल

बलिदान-अग्नि  में दहका कर 

मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर ।।


अज्ञान तिमिर है निगल रहा 

संसार अग्नि में झुलस रहा

ज्ञान-अमृत बन बरसा कर
मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर 


मेरे स्नेह पुष्प तू महका कर।।




                                                                            —शिव नारायण वर्मा

4 comments:

  1. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ३० अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    ReplyDelete
  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ३० अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    ReplyDelete
  3. निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' २१ मई २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने साप्ताहिक सोमवारीय अंक के लेखक परिचय श्रृंखला में आपका परिचय आदरणीय गोपेश मोहन जैसवाल जी से करवाने जा रहा है। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/



    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    ReplyDelete
  4. निमंत्रण विशेष : हम चाहते हैं आदरणीय रोली अभिलाषा जी को उनके प्रथम पुस्तक ''बदलते रिश्तों का समीकरण'' के प्रकाशन हेतु आपसभी लोकतंत्र संवाद मंच पर 'सोमवार' ०९ जुलाई २०१८ को अपने आगमन के साथ उन्हें प्रोत्साहन व स्नेह प्रदान करें। सादर 'एकलव्य' https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    ReplyDelete